'पापा' आपका जाना दे गया इक रिक्तता जीवन में,
असहनीय पीड़ा मेरे मन में..
'माँ' आज भी बातें करती है लोगों से,
लेकिन उसकी बातों में होता है इक 'खालीपन'
आज भी उसकी निगाहें देखती हैं चहुँ ओर 'पर' उसकी आँखों में हैं इक 'सूनापन'... माँ के, दीदी के छोटू के, भैया के .. सबके मन में आपकी याद बसी है
'वो' दरख़्त की जिसके नीचे बरसों शाम गुजारी थी आपने उस दरख़्त के हर पत्ते, हर बूटे में आपकी याद बसी है, वो सुबह सवेरे 'आपका' बरामदे में बैठना 'और' घंटो अखबार के पन्ने पलटना, दरवाज़े की उस चौखट पर, अखबार के हर पन्ने पर आपकी याद बसी है..
उस बिस्तर में उस बर्तन में, माँ की हर बात में उसके हर जज्बात में, आँगन के हर कण कण में, आपकी याद बसी है...
जीवन तो चलता रहेगा 'लोगों का' पूर्ववत, यथावत पर 'माँ' के जीवन का एकाकीपन बन जायेगा 'अंतहीन सफ़र'
By my Sister
This page is dedicated to my "papa" who passed away on January 14, 2011 leaving us alone with his memories.